Janmashtami
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Nand Ke Anand Bhayo Lyrics in Hindi | जन्माष्टमी का प्रसिद्ध भजन

Gupt Vrindavan Dham

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Janmashtami Seva

August 31, 20263 min read
Nand Ke Anand Bhayo Lyrics in Hindi | जन्माष्टमी का प्रसिद्ध भजन

नंद के आनंद भयो भजन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में गाया जाने वाला सबसे लोकप्रिय जन्माष्टमी भजनों में से एक है। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” सुनते ही मन में गोकुल में हुए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का सुंदर दृश्य आने लगता है।

जब भगवान श्रीकृष्ण ने माता यशोदा और नंद बाबा के घर जन्म लिया, तब पूरे गोकुल में आनंद छा गया। हर ओर बधाइयां गाई गईं और भक्तों ने नाचते-गाते हुए कन्हैया के जन्म का उत्सव मनाया। आज भी जन्माष्टमी, नंदोत्सव और लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव पर यह भजन बड़े प्रेम और उत्साह के साथ गाया जाता है।

नीचे आप Nand Ke Anand Bhayo Lyrics in Hindi पढ़ सकते हैं और जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इस भजन का आनंद ले सकते हैं।

नंद के आनंद भयो लिरिक्स हिंदी में

आनंद उमंग भयो,
जय हो नंदलाल की।
नंद के आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की॥

ब्रज में आनंद भयो,
जय यशोदा लाल की।
हाथी घोड़ा पालकी,
जय कन्हैया लाल की॥

जय हो नंदलाल की,
जय यशोदा लाल की।
गोकुल में आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की॥

आनंद उमंग भयो,
जय हो नंदलाल की।
नंद के आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की॥

ब्रज में आनंद भयो,
जय यशोदा लाल की।
नंद के आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की॥

कोटि ब्रह्मांड के,
अधिपति लाल की।
हाथी घोड़ा पालकी,
जय कन्हैया लाल की॥

गौ चराने आए,
जय हो गोपाल की।
गोकुल में आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की॥

पूनम के चांद जैसी,
शोभा नंदलाल की।
हाथी घोड़ा पालकी,
जय कन्हैया लाल की॥

भक्तों के आनंदकंद,
जय यशोदा लाल की।
गोकुल में आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की॥

आनंद से बोलो सब,
जय हो ब्रजलाल की।
हाथी घोड़ा पालकी,
जय कन्हैया लाल की॥

आनंद उमंग भयो,
जय हो नंदलाल की।
नंद के आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की॥

नंद के आनंद भयो भजन का अर्थ

“नंद के आनंद भयो” का सरल अर्थ है कि नंद बाबा के घर आनंद का जन्म हुआ है। यहां “आनंद” भगवान श्रीकृष्ण के लिए प्रयोग किया गया है, क्योंकि उनके जन्म से नंद बाबा, माता यशोदा और पूरे गोकुल का जीवन खुशियों से भर गया था।

“जय कन्हैया लाल की” के माध्यम से भक्त बाल कृष्ण की जय बोलते हैं। वहीं, “हाथी घोड़ा पालकी” उत्सव की भव्यता और उल्लास को दर्शाता है। पूरा भजन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, उनके बाल रूप और गोकुलवासियों के प्रेम का गुणगान करता है।

नंद के आनंद भयो भजन का महत्व

यह जन्माष्टमी भजन भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप से जोड़ता है। इसे गाने से मन में प्रेम, प्रसन्नता और भक्ति का भाव जागता है। इस भजन की सरल पंक्तियां छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को आसानी से याद हो जाती हैं।

यह केवल एक बधाई गीत नहीं है, बल्कि भक्तों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य आगमन का स्वागत भी है। जब सभी भक्त एक साथ “जय कन्हैया लाल की” बोलते हैं, तब जन्माष्टमी का उत्सव और भी आनंदमय हो जाता है।

FAQs

नंद के आनंद भयो भजन किस भगवान को समर्पित है?

नंद के आनंद भयो भजन भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप को समर्पित है। इसमें नंद बाबा और माता यशोदा के घर श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी का वर्णन किया गया है।

नंद के आनंद भयो भजन कब गाया जाता है?

यह भजन मुख्य रूप से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, नंदोत्सव, लड्डू गोपाल जन्मोत्सव और कृष्ण भजन संध्या के दौरान गाया जाता है।

हाथी घोड़ा पालकी का क्या अर्थ है?

यह पंक्ति भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की भव्यता और भक्तों के उत्साह को दर्शाती है। इसके माध्यम से भक्त आनंद के साथ कन्हैया की जय बोलते हैं।

क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?

हां, जन्माष्टमी की पूजा, लड्डू गोपाल के अभिषेक और आरती के बाद परिवार के साथ यह भजन गाया जा सकता है।

निष्कर्ष

नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी को प्रकट करने वाला सुंदर और आनंदमय भजन है। जन्माष्टमी की रात जब भक्त प्रेमपूर्वक यह भजन गाते हैं, तब पूरा वातावरण गोकुल के नंदोत्सव जैसा भक्तिमय हो जाता है।

इस जन्माष्टमी पर परिवार और मित्रों के साथ नंद के आनंद भयो लिरिक्स हिंदी में गाएं और प्रेम से बोलें—हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की!

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